Farmers Protest : सिंधु के बॉर्डर पर पंजाब के कुछ किसानों ने जहरीला पदार्थ खाकर की आत्महत्या | kisan andolan news

Farmers Protest : सिंधु के बॉर्डर पर पंजाब के कुछ किसानों ने जहरीला पदार्थ खाकर की आत्महत्या | kisan andolan news

Kissan andolan


किसान आंदोलन एक बड़ा सा नया रूप ले रहा है लेकिन इसका फैसला अभी तक नहीं हो पाया किसान आंदोलन डेढ़ महीने हो गए हैं अभी भी जारी है किसानों ने दिल्ली सिंधु बॉर्डर पर धरना दिए हुए बैठे हैं लेकिन किसानों का अभी तक कोई भी फैसला नहीं हुआ है।
पंजाब चंडीगढ़ केंद्र सरकार ने कृष कानूनों के खिलाफ बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन में बहुत से लोग भाग ले रहे हैं लेकिन पंजाब के 40 वर्षीय किसान ने शनिवार को लगभग 7:08 बजे कोई जहरीला पदार्थ खाकर उस किसान ने आत्महत्या कर ली इस जानकारी को पुलिस ने बताया सेनापति के कुंडली पुलिस थाने में निरीक्षक रवि कुमार ने कहा कि किसान अमरिंदर सिंह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले का रहने वाला था उसे सेनापति के स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया लेकिन वहां पर उसकी मौत हो गई लेकिन इसी को देखते हुए नए क्रश कानून के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से किसान इस आंदोलन में भाग ले रहे हैं खासकर पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली की सीमाओं और पिछले 1 महीने से अधिक इस नए कानून के खिलाफ प्रदर्शन पर जुटे हुए हैं।


किसान आंदोलन में कई बड़े कलाकार शामिल


इस कंसल्ट में स्वरा भास्कर के अलावा बहुत सारे कलाकार इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं रब्बी शेरबैं, हरभजन मान, आर्य बब्बर, जजी बैंस, नूर चाहल और गुरप्रीत सैनी भी इस किसान आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। इसका आयोजन संयुक्त किसान मोर्चा के मुख्य मंच पर किया गया किसानों को संबोधित करते हुए स्वरा भास्कर ने बताया कि मैं यहां पर एक कलाकार के तौर पर आई हूं और मैं देश के नागरिक के तौर पर उन लोगों का समर्थन करती हूं जो शहर में पले बढ़े लेकिन कभी गांव नहीं गए।


इस लड़ाई में शामिल होने पर किसानों का धन्यवाद-स्वरा भास्कर


स्वरा भास्कर ने बताया कि सरकार के इस तीन नए कृषि कानून के खिलाफ लड़ाई हर देश के समस्त नागरिकों की है उन्होंने बताया कि मैं पूरे देश की तरफ से आप सभी का धन्यवाद करती हूं कि हमारी लड़ाई कोई प्रदर्शन के माध्यम से लड़ रहे हैं मुझे आज शर्म आ रही है कि हमारा देश समाज इस तरह का हो गया है जहां बुजुर्गों की देखभाल करने के लिए उन्हें इतनी ठंड में सड़क पर बैठाने के लिए विवश किया गया।

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